शब ए बारात को लेकर सजे कब्रिस्तान और खानकाएं,

खंडवा। रहमतों बरकतों और हिसाब किताब वाली रात शबे बारात मुबारक मौके पर मंगलवार को मुस्लिम समाजजन रात भर इबादत कर मगफिरत के दुआए की जाएगी।
शबे बरात को लेकर विगत एक सप्ताह से शहर के कब्रिस्तानों खानकाओं में साफ सफाई और तैयारी की जा रही है खासकर कब्रिस्तान स्थित खबरों पर लोग अपने मरहूम लोगों की कब्र की साफ सफाई कर उनकी मगफिरत के लिए दुआएं कर रहे हैं। इसके अलावा वाली आलिया और बुजुर्गों के दिन के मजारों पर भी रंग रोगन के काम किए गए हैं।
शब-ए-बारात के एक दिन पहले सोमवार को शहर के बाद कब्रिस्तान वी जूनी इंदौर लाइन स्थित छोटा कब्रिस्तान नागपुर रोड स्थित कब्रिस्तान बुलंद सहित कब्रिस्तान में लोग बड़ी संख्या में अपने मरहूमों की कब्र पर पहुंचे कहीं मरहूम से थे जिनका पहला त्यौहार था इसलिए लोग परिवार सहित फतिहा पढ़ने के लिएआए।
वहीं मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग मगरिब और ईशा की नमाज के बाद कब्रिस्तान पहुंचेंगे।
फजीलत और बरकत वाली रात
शाही जामा मस्जिद के खातिब व इमाम मौलाना रिजवान अहमद मिस्बाही ने बताया कि इस्लाम में शब-ए-बरात की रात को बेहद फज़ीलत और अफज़लियत वाली बताया गया है। इस बार शब-ए-बरात मंगलवार 3 फरवरी को अकीदत और एहतराम के साथ मनाई जाएगी। उलमा के मुताबिक इस मुबारक रात में सच्चे दिल से मांगी गई दुआएं अल्लाह तआला कबूल फरमाता है। मंगलवार को मुसलमान मगरिब की नमाज के बाद मस्जिदों की ओर रुख कर लेंगे। जिसके बाद इशा की नमाज़ के बाद कब्रिस्तान जाकर अपने बुजुर्गों की कब्र पर फातिहा पढ़ेंगे।
शब-ए-बरात की पूरी रात इबादत में मशगूल रहे। इस रात अल्लाह की रहमत बरसती है। इस रात बंदों की उम्र, रोजी, सेहत और जिंदगी निर्धारित की जाती है। इसलिए हमें चाहिए कि हम लोग पूरी रात इबादत करके अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगें, गलत कामों से तौबा करें। अपने लिए बरकत, रहमत व मगफिरत की दुआ करें।
- शब ए बारात का महत्व
इस रात अल्लाह इंसान के पिछले आमालों (काम) को ध्यान में रखकर उसके आने वाले सालों की किस्मत लिखता है, कौन कब पैदा होगा और कौन कब मरेगा इसका रिकॉर्ड भी इस दिन लिखा जाता है।
यह रात सूरज के डूबने के बाद मगरिब की अज़ान से शुरु होती है और सुबह फजर की नमाज के समय खत्म होती है, इस रात अल्लाह से जो भी दुआ मांगो वह कबूल होती है, लोग खुदा से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं, लेकिन मगफिरत (माफी) तब तक नहीं मिलती जब तक दिल से तौबा न की जाए।